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| नग्गर में रखे रूसी चित्रकार रेरिख़ के चित्र असली |

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विशेषज्ञों के एक आयोग ने हिमाचल प्रदेश के नग्गर नामक क़स्बे में रूसी चित्रकार निकलाय रेरिख़ की जागीर में बने रेरिख-संग्रहालय में उपस्थित निकलाय रेरिख़ और स्वितास्लाव रेरिख़ के 49 चित्रों को उनकी जाँच करने के बाद असली चित्र बताया। भारत स्थित रूस के राजदूत अलेक्सान्दर कदाकिन ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि एक सप्ताह पहले रूस और भारत के विशेषज्ञों ने भारत स्थित रूस के दूतावास की पहल पर रेरिख़-संग्रहालय में उपस्थित रेरिख़-परिवार के सामान की व्यापक-सूची बनानी शुरू कर दी है। इस सूची का उद्देश्य सन् 1928 में नग्गर में बस गए रेरिख़-परिवार की विरासत को दस्तावेज़ के रूप में अंकित करना तथा अंतर्राष्ट्रीय रेरिख़ स्मारक ट्रस्ट के बहुमुखी विकास की योजना को आगे बढ़ाना है।
विशेषज्ञ आयोग ने इस बात की पुष्टि की है कि निकलाय रेरिख़ की सभी 37 पेंटिंग और उनके पुत्र स्वितास्लाव रेरिख़ की 12 पेंटिग संग्रहालय में सुरक्षित रखी हुई हैं।
भारत स्थित रूस के राजदूत अलेक्सान्दर कदाकिन के अनुसार विशेषज्ञ आयोग ने स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित इस सूचना का खंडन किया है कि रेरिख़ परिवार के कुछ चित्र चोरी हो गए हैं। आयोग ने इसका भी खंडन किया है कि इन चित्रों की प्रतियाँ बनाई जाने की वज़ह से अन्तर्राष्ट्रीय रेरिख़ स्मारक ट्रस्ट की गतिविधियाँ संदेह के घेरे में आती हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार के कुछ अधिकारियों ने तो इस सवाल पर इतना हंगामा किया था कि इस ट्रस्ट से रूस के प्रतिनिधियों को ही निकाल बाहर करने का सवाल उठाया जाने लगा था।
अन्तर्राष्ट्रीय रेरिख़ स्मारक ट्रस्ट जल्दी ही अपनी स्थापना की बीसवीं जयन्ती मनाएगा। इस ट्रस्ट की स्थापना स्वयं स्वितास्लाव रेरिख़ ने की थी। यह जयन्ती आगामी 14-15 जुलाई को नग्गर में मनाई जाएगी। |












